गुजरात चुनाव: भाजपा बना रही है नई रणनीति, पाटीदारों को आरक्षण का लॉलीपॉप

अन्य पिछड़ा वर्ग के दूसरे नेता भाजपा से नाराज

अहमदाबाद(JT NEWS TEAM), 28 सितंबर:- विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी के गुजरात दौरे को पाटीदार समाज से मिली उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया को भांपते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस रणनीति के तहत वह एक ओर पाटीदारों को लुभाने की कोशिश में जुट गए हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस का पाटीदारों पर प्रभाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मंगलवार को राज्य सरकार और पाटीदार नेताओं के बीच मीटिंग भी हुई जिसमें सरकार की तरफ से समुदाय के लिए कई घोषणाएं भी की गईं।


इन घोषणाओं में अनारक्षित केटेगरी में आने वाले समुदायों के लिए आयोग के गठन के साथ, पाटीदार युवाओं के खिलाफ पुलिस मामलों को वापस लेने और आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी और मुआवजा देना शामिल है। इसी दौरान राज्य के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने पाटीदारों को बीजेपी के पाले में रखने के लिए घोषणा की कि पार्टी में ओबीसी नेताओं के साथ अनुचित व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि यह घोषणा ओबीसी समुदाय से आने वाले पार्टी के कुछ सांसद और विधायकों ने गुजरात के तीन दिन के दौरे पर आए अमित शाह से नाराजगी जाहिर करने के बाद हुई।

ध्यान देने वाली यह है कि अमित शाह के इशारे पर ही हार्दिक और नितिन पटेल के बीच जल्दबाजी में मीटिंग रखी गई। यह मीटिंग राहुल गांधी को पटेल भूमि सौराष्ट्र में मिल रही प्रतिक्रिया को देखते हुए बुलाई गई थी। बीजेपी के एक नेता के अनुसार, ‘फिलहाल बीजेपी पाटीदार आंदोलन की वजह से गुजरात में एक भी सीट हारने को तैयार नहीं है।
अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें मनाने के लिए कुछ और घोषणाएं भी की जा सकती हैं।’

घोषणाएं हवा साबित होती दिख रही हैं
वहीं हार्दिक पटेल ने बुधवार को कहा कि इसी तरह की घोषणाएं आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भी की थी लेकिन इनमें किसी का भी परिणाम सामने नहीं आया। इस बार भी जो घोषणाएं की गई हैं वो सिर्फ हवा साबित होते दिख रही हैं क्योंकि विधानसभा से उन्हें पास होने में समय लगेगा। तब तक चुनाव खत्म हो चुके होंगे और इसी बात का सरकार इंतजार कर रही है। पटेल ने आगे कहा, ‘यह तीसरी बार है जब राज्य सरकार ने पाटीदारों के खिलाफ पुलिस केस वापस लेने का वादा किया है लेकिन पिछली दो बार की तरह इस बार भी तय है कि समय के साथ कुछ नहीं होगा।’ हार्दिक ने कहा कि मंगलवार को सरकार द्वारा तीन वादों में पाटीदारों के आरक्षण के लिए कोई बात नहीं की गई है जबकि हमारी लड़ाई इसी के लिए है जो जारी रहेगी।

एक समुदाय के लिए बाकी नजरअंदाज क्यों
एक वरिष्ठ ओबीसी नेता के अनुसार, ‘बीजेपी क्यों सिर्फ एक समुदाय के लोगों को मनाने में लगी है? क्या उसे आर्थिक रूप से पिछड़ी दूसरी ओबीसी जातियों का दर्द नहीं दिखता? गुजरात के मतदाताओं में ओबीसी के करीब 147 समुदाय की 52 फीसदी भागीदारी है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि कैसे बीजेपी मतदाताओं के एक बड़े भाग को आर्थिक रूप से समर्थ और पहले से ही विशेषाधिकार प्राप्त समुदाय के लिए नजरअंदाज कर रही है।

सरदार पटेल समूह के अध्यक्ष लालजी पटेल का कहना है कि हार्दिक औऱ मैं पाटीदारों के आरक्षण के लिए पिछले दो साल से हक की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। हालांकि सरकार और पाटीदारों के 300 नेताओं के बीच मीटिंग में कुछ ठोस परिणामों के निकलने की उम्मीद है।

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