अगर किसी नेता को है हराना, तो उससे इस मेले का उद्घाटन करवाना


जयपुर(JT NEWS TEAM):- देश के प्राचीन पशु मेलों में शुमार जयपुर के भावगढ़ बंध्या गर्दभ (गधा) मेले से जुड़ा एक दिलचस्प मुद्दा सामने आया है । जो सीधा राजनेताओं से जुड़ा है। मेला आयोजकों की माने तो बरसों से यहां मेले का उद्घाटन करने कोई नेता नहीं पहुंचता। बड़े जतन और जुगाड़ से किसी स्थानीय नेता के हाथों ही इसका उद्घाटन करना पड़ता है।
दरअसल, इस सालाना मेले को लेकर हर बार नेता मुंह मोड़ लेते हैं। नेता नाई तक की दुकान का उद्घाटन करने पहुंच जाते हैं लेकिन इस प्राचीन गधों के मेले में बुलाने पर भी नहीं आते। इसके पीछे यह मान्यता है कि जिस नेता ने मेले का उद्घाटन किया उसे अगले चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ता है।

भावगढ़ के पार्षद मोहनलाल मीणा ने भी इस दिलचस्प और मेला आयोजकों के लिए बड़ी परेशानी वाली बात पर सहमति जताई है। हैरत में डालने वाली बात यह है कि कई नेता मेले के उद्घाटन के लिए पहले तो हां करते देते हैं लेकिन उद्घाटन वाले दिन नहीं पहुंचते। ऐसे में आयोजकों को उद्घाटन के लिए भी नेता का जुगाड़ करना पड़ता है।
खलखाणी माता का मंदिर है आस्था का केंद्र
जयपुर के पास गोनेर रोड स्थित भावगढ़ बंध्या में प्रतिष्ठित खलखाणी माता का मंदिर आज भी आस्था का केन्द्र बना हुआ है। माता के दरबार में जयपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश से भी लोग शीश नवाने आते हैं। माता को नवरात्र में खीर, पुए एवं पूड़ी का भोग अर्पित किया जाता है।
पहले बरसात नहीं होने पर महिलाएं माता के दरबार में भोग लेकर गीत गाती हुई आती थीं। भोग लगते ही बारिश हो जाती थी। दरअसल,पहले यह गांव गौड़ राजपूतों की जागीर में था। बाद में महाराजा माधोसिंह ने यह गांव ईश्वर सिंह को जागीरी में प्रदान किया। मंदिर के खर्च के लिए छह बीघा जमीन निकाली गई। यहां भरने वाला गधों का मेला एशिया में खलखाणी माता के नाम से प्रसिद्ध है।

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