मुगलकालीन इमारते भारतीय संस्कृति पर धब्बा तो लाल किले से झंडा फहराना छोड़ दे मोदी: ओवैसी

यूपी(), 16 अक्टूबर:- ताज महल को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। यूपी के बीजेपी विधायक संगीत सोम द्वारा ताज महल को भारतीय संस्कृति पर धब्बा बताए जाने के बाद हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी आलोचना की और कहा कि ताज महल भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, जिस पर पूरी दुनिया को गर्व है। मुस्लिम शासकों द्वारा बनाई गई इमारतों को बीजेपी द्वारा धरोहर नहीं मानने पर उन्होंने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से झंडा फहराना छोड़ देंगे। इस विवाद में अब बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव भी कूद पड़े हैं। उन्होंने कहा है कि अंग्रेजों से ज्यादा क्रूर और उत्पाती मुस्लिम शासक थे। राव ने कहा कि अंग्रेजों ने जितनी लूट और देश की बर्बादी की उससे कई गुना ज्यादा मुस्लिम शासकों ने किया है।
राव ने कहा, “यह ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत में मुगल शासकों और अंग्रेजों ने हजार साल से ज्यादा वक्त तक हिन्दुस्तान पर शासन किया। इस दौरान मुस्लिम शासकों ने जबरन धर्मांतरण कराया, लोगों का उत्पीड़न किया और हिन्दुओं पर अत्याचार किए। उन्होंने कहा, “भारतीय संस्कृति को ना सिर्फ कुचला गया बल्कि उसकी दुनियाभर में होने वाली इसकी छवि भी धुमिल हुई।” उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों और नेताओं ने वोट बैंक के लिए छद्म साम्प्रदायिकतावाद की आड़ में तुष्टिकरण की नीति अपनाई है लेकिन संगीत सोम ने असली तथ्य लोगों के सामने लाया है।


संगीत सोम ने कहा था कि ताज महल भारतीय संस्कृति पर धब्बा है। रविवार (15 अक्टूबर) को सोम ने कहा कि ताज महल बनाने वाले मुगल शासक ने उत्तर प्रदेश और हिंदुस्तान से सभी हिंदुओं का सर्वनाश किया था। ऐसे शासकों और उनकी इमारतों का नाम अगर इतिहास में होगा तो वह बदला जाएगा। हालांकि, उनकी ही पार्टी के राष्ट्रीय सचिव आर पी सिंह ने कहा है कि ताज महल न केवल देशी-विदेशी पर्यटकों का आकर्षण केंद्र है बल्कि वह मुगलकालीन स्थापत्य कला का एक जीता जागता नमूना है, जिसकी कद्र पूरी दुनिया करती है।

गौरतलब है कि इस साल सबसे पहले योगी आदित्यनाथ ने ही ताज महल को भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि ताजमहल एक इमारत के सिवा कुछ नहीं है। बिहार के दरभंगा में 15 जून को एक जनसभा में उन्होंने कहा था कि देश में आने वाले विदेशी गणमान्य व्यक्ति ताजमहल और अन्य मीनारों की प्रतिकृतियां भेंट करते थे जो भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

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